अंगूठी की कीमत – Best Short Story In Hindi

Best Short Story In Hindi – वैसे तो सभी कहानी बेस्ट ही होती है लेकिन एक गुरु और शिष्य की कहानी हरदम बेस्ट ही होती है । शिष्य के प्रशन हमेश एक सिख देते है जो उनके गुरु उन्हें समझाते है । यह उनमे से एक बेस्ट स्टोरी है ।

Best Short Story In Hindi

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अंगूठी की कीमत

एक नोजवान शिष्य अपने गुरु के पास पंहुचा और बोला, गुरु जी एक बात समझ नहीं आती, आप इतने साधारण वस्त्र क्यों पहनते हैं इन्हे देख कर लगता ही नहीं की आप एक ज्ञानी व्यक्ति हैं जो सैकड़ों शिष्यों को शिक्षित करने का महान कार्य करते है ।

गुरु जी मुस्कुराये, फिर उन्होंने अपनी ऊँगली से एक अंगूठी निकली और शिष्य को देते हुए बोले, मैं तुम्हारी जिज्ञासा अवश्य शांत करूँगा लेकिन पहले तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो । इस अिंगूठी को लेकर बाज़ार जाओ और किसी सब्जी वाले या ऐसे ही किसी दुकानदार को इसे बेच दो । बस इतना ध्यान रहे की इसके बदले कम से कम सोने की एक असरफी ज़रूर लाना ।

शिष्य फोरन यह सुनकर उस अंगूठी को लेकर बाज़ार गया पर थोड़ी देर में अिंगूठी वापस लेकर लौट आया ।

“क्या हुआ, तुम इसे लेकर लौट क्यों आये?”

“गुरुजी ने शिष्य से पूछा”

“गुरुजी, मैंने इसे हर सब्जी वाले, किराने वाले और अन्य दुकानदारो को बेचने का बहुत प्रयास किया पर कोई भी इसके बदले सोने की एक असरफी देने को तैयार ही नहीं हुआ”

गुरु जी ने कहा, “अच्छा कोई बात नहीं अब तुम इस बार इसे लेकर किसी जौहरी के पास जाओ और इसे बेचने की कोशिश करो” शिष्य एक बार फिर अंगूठी लेकर निकल पड़ा , पर इस बार भी कुछ ही देर में वापस लोट आया ।

“क्या हुआ गुरूजी ने पूछा”

शिष्य के हाव -भाव कुछ अजीब लग रहे थे , वो घबराते हुए बोला , ” अरररे.. नहीं गुरु जी , इस बार मैं जिस भी जौहरी के पास गया सभी ने ये कहते हुए मुझे लौटा दिया की यहाँ के सारे जौहरी भी मिलकर इस अनमोल हीरे को नहीं खरीद सकते इसके लिए तो लाखों असरफिया भी कम हैं ।

यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है, गुरु जी बोले, जिस प्रकार ऊपर से देख कर इस अनमोल अंगूठी की कीमत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता उसी प्रकार किसी व्यक्ति के वस्त्रो को देखकर उसे आँका नहीं जा सकता । व्यक्ति की विशेषता जानने के लिए उसे भीतर से देखना चाहिए, बाह्म आवरण तो कोई भी धारण कर सकता है लेकिन आत्मा की शुद्धता और ज्ञान का भण्डार तो अन्दर ही छिपा होता है।

शिष्य की जिज्ञासा शांत हो चुकी थी । वह समझ चुका था की बाहरी वेश-भूषा से व्यक्ति की सही पहचान नहीं हो सकती , जो बात मायने रखती है वो ये की व्यक्ति भीतर से कैसा है ।

ऐसी ही दो कहानिया जो आपको पसंद आएगी बुराई के बदले भलाई और सही दिशा चुने

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