Essay On Sparrow In Hindi Language

Essay On Sparrow In Hindi Language – Aaj hum aapko sparrow pa kuch khaas batein btane wale haan jo ki aap ek nibhand ka taur par bhi istemal kar sakta haan. Isliye iss essay ya information ko jarur pade and apna sujhav da. Issa pehla humna aapko our national bird peacock aur jal hi jeevan haan par bhi ek nibhand ka madhyam sa kafi important information di thi.

Essay On Sparrow In Hindi Language

Sparrow सबके मन को मोह लेते हैं। आकार में छोटा यह पक्षी करतब दिखाता अनोखा है। गौरैया अथवा चिड़िया सब जगह पाया जाता है। नर और मादा जब घरों में बाग बगीचों में अनायास ही बिना किसी भय के घुस आते हैं तो हम भी उनका स्वागत ही करते हैं। लगभग सभी स्थानों पर sparrow उपलब्ध हैं । ये साधारण और छोटे आकार के आम पक्षी हैं। आम तौर पर, वे अनाज और कण के शौकीन हैं। वे कुछ प्रकार के अनाज और कीट भी खाते हैं।

sparrow विशेषज्ञ नस्ल-बिल्डर नहीं हैं उनकी प्राथमिकता झोपड़ी और घरों में रहने की है। वे आमतौर पर आदमी के साथ रहने के आदी रहे हैं हालांकि, इन पक्षियों को पिंजरे नहीं रखा जाता है। निविदा और छोटे होने के नाते, ये बिल्लियों और कुत्तों से डरते हैं। बिल्लियों अक्सर इन पक्षियों पर शिकार करते हैं यदि उन्हें मौका मिलता है ।

sparrow जोड़े या समूह में रहते हैं। यदि उन्हें कुछ भोजन या मकई दी जाती है, तो वे बड़ी संख्या में आते हैं और उन्हें खा जाते हैं। आम तौर पर वे साल में एक या दो बार नए लोगों को जन्म देते हैं। एक समय में दो या तीन बच्चे पैदा होते हैं। पन्द्रह से बीस दिनों के लिए छोटे बच्चों को घोंसले में खिलाया जाता है और फिर ये बाहर निकल जाते हैं। शुरुआती माता-पिता में उनके साथ आते हैं और उनकी सहायता करते हैं तो वे व्यक्तिगत रूप से उड़ते हैं ।

Sparrow को पेसरी फाम्र्स (छोटे व मध्यम आकार के पक्षी) वर्ग में रखा गया है इसे अंग्रेजी व लैटिन भाषा में हाउस स्पैरो कहा जाता है । पर्यावरण, वन्य जीव क्षेत्रों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक कभी गांव जुड़ई कीट खाकर जीवित रहने वाली यह घरेलू चिड़िया अब खेत खलिहानों से विलुप्त होने की कगार पर है।

एक ही मौसम में कई बार अण्डे देने वाली मटमैली-भूरे रंग की तथा छाती पर एक काली सी पट्टी लिये हुऐ sparrow कभी कभी बया चिड़िया की तरह दिखाई पड़ती है। जलवायु परिवर्तन के कारण sparrow की प्रजनन क्षमता में भी समय के साथ बदलाव आये हैं ।

जानकार बताते हैं कि जबसे किसानों ने खेतों में जैविक कृषि से मुंह चुराकर अधिक उत्पादन खेतों से लेने के लिये हाइब्रिड बीजों, कीटनाशक दवाओं व रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग शुरू किया तभी से बदलते क्लाइमेट से उत्पन्न होने वाले अनाज के दानों को खाकर गौरैया भी मरने लगी है।

AAsha karta haan ye pad kar aapko kafi acha laga hoga. Agar aur achi batein janna chahte haan to essay on global warming and आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध – Adhunik Shiksha Pranali Essay ka bare mein zarur pade.

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