एक पेड़ की कहानी – Kahaniya In Hindi With Moral

एक पेड़ की कहानी – Kahaniya In Hindi With Moral – हर किसी की ज़िन्दगी में समस्याए आती है लेकिन अगर हम उन्हें शुरवात में ही समाप्त करदे तो सरलता से हो जाती है लेकिन इन समस्याओ को बढता रहना देने की गलती अंत में हमपर बहुत भारी पढती है । आज हम आपको यही सीख एक कहानी के माद्यम से बताएंगे ।

एक पेड़ की कहानी - Kahaniya In Hindi With Moral

एक पेड़ की कहानी – Kahaniya In Hindi With Moral

एक पेड़ की कहानी

जंगल में एक हरा भरा पेड़ था। उसकी आँखों से आँसू टपक रहे थे। पेड़ के आंसुओ को देखकर उड़ते हुए गरुड़ पक्षी ने पेड़ से पूछा, ‘अरे मित्र, तमु रो क्यों रहे हो? क्या मैं तुम्हारी कुछ सहायता करू?

पेड़ बोला, ‘भाई गरुड़, जंगल में सभी वृक्षों पे घोंसले है, जिनमें छोटे-छोटे बच्चों की चहचहाहट है। पर मेरी डालों पर एक भी घोंसला नहीं है, इसलिए मैं बहुत दुखी हूँ । तुमको तो गरुड़ राज भी कहा जाता है। जिस वृक्ष पर तुम रहते हो, उसमे ढेर सारे पक्षी तुम्हारी छत्रछाया में आकर रहने लगते हैं।क्या तुम मेरी डाल पर अपना घोंसला नहीं बना सकते?

पेड़ की बात सुनकर गरुड़ को दया आ गई। उसने अपना घर पेड़ की डाल पर बना लिया । बहादुर गरूड़ का घर देख कर ढेर सारे पक्षिओ ने भी वहा अपना घोंसले बना लिए । गरुड़ के कारण पक्षिओ को किसी भी चील या बाज आदि का खतरा नहीं था।

सभी पक्षी बहादुर गरुड़ का कहा मानते थे। फिर एक दिन गरुड़ ने पेड़ से कहा, ‘मित्र, अब तो तुम्हारी डालों में ढेर सारे घोंसलें हैं। मुझे अपने मित्रो से मिले बहुत समय हो गया है। मैं कुछ समय के लिए यहाँ से जा रहा हूँ । गरुड़ अपने मित्रो से मिलने चला गया।

दूसर दिन एक कठफोड़वे का बच्चा उड़ना सीख रहा था वह निचे पेड़ से निचे फुदका। वहाँ उसे छोटे- छोटे कीड़ों की कतार दिखी। उसने ध्यान से देखा, कीड़े पेड़ की एक डाल में छेद करने में जुटे हुए थे। बच्चे ने माँ से कहा माँ – माँ, देखो ये कीड़े हमारे पेड़ में क्या कर रहे है?

वह बोली, ‘वे जो कुछ कर रहे है, करने दे तू जल्दी-जल्दी उड़ना सीख। पर माँ वे तो पेड़ की डाल में छेद कर रहे है, ‘बच्चे ने जीद जिद की । माँ ने बच्चे को एक चपेट लगाई और फिर उसे लेकर उड़ गई।

उधर से पेड़ को अपनी शाखा मे दर्द महसूस हुआ। उस शाखा में हरियल तोते रहते थे। पेड़ ने उनसे कहा, ‘अरे देखो मेरी डाल में क्या हो रहा है। मैं दर्द से परेशान हूँ । हरियल तोते निचे उतरे। उन्होंने वहा पेड़ पर ढेर सारी दीमक को पाया। तोते शाकाहारी थे और उनकी चोंचें भी मुडी हुई थी। इसलिए दीमक का सफाया करना उनके बस की बात नहीं थी। उन्होंने गौरैया से कहा, ‘बहन, हमारी डाल में दीमक ने हमला बोल दिया है। तुम अपनी पेनी चोंच से उसको मार भगाओ।’

गौरैया ने कहा, मेरी बला से लगने दो दीमक, वह तो तुम्हारी डाल पर लगी है, मैं क्यों मेहनत करूँ ?

सात-आठ दिन में डाल सूख गई। पत्ते मुरझा गए। तोतों के छिपे हुए घोंसले साफ-साफ दिखाई देने लगे। अब तोतों को भय हो गया की उनके नन्हे – नन्हे बच्चों पर हमला हो सकता है। बल्कि पेड़ के दूसरे पक्षी निश्चिंत थे । उन्होने यह जानने की बिलकुल कोशिश नहीं की डाल कैसे सूख गई?

दीमक ने अन्दर ही अन्दर पेड़ के तने व अन्य डालों पर भी हमला बोल दिया। पूरा का पूरा पेड़ सूखने लगा। अब घबराकर सब पक्षी दीमक मरने गए। पर अब तक बहुत देर हो चुकी थी । दीमक पेड़ के अन्दर प्रवेश कर चुकी थी । अब उनको समाप्त करना संभव ना था।

कुछ ही दिनों में पूरा का पूरा पेड़ सूखकर कांटा हो गया। हरियल तोतों ने कहा, ‘तुम सब लोगों की लापरवाही के कारण यह अनर्थ हुआ है। यदि कठफोड़वा, गौरैया या मैना ने साथ दिया होता तो दीमक शुरू में ही मारी जाती, पर सबने हमारी डाल पर किये गए हमले को मात्र तोतों की ही समस्या समझा। इस प्रकार दुश्मन को हमारे घर में घुसने का मौका मिल गया। सच, यदि हम में एकता व भाईचारा होता तो हमें यह दिन ना देखना पड़ता, ‘कहते-कहते हरियल तोतों का गला भर आया।

मोरल ऑफ़ स्टोरी – सच, यदि किसी छोटी सी समस्या को अनदेखा कर दिया जाये, तो वह एक बड़ी समस्या बन सकती है। यह बात सभी पक्षिओ की समझ में आ चुकी थी। पर अब क्या हो सकता था। उनकी लापरवाही से सबके घर उजड़ चुके थे।

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