डाकू की ईमानदारी – Story In Hindi With Moral

डाकू की ईमानदारी – Story In Hindi With Moral – ईमानदारी आज कल एक ऐसी चीज़ हो गयी है जो मिलना बहुत मुश्किल हो गया है और इसके कारण लोगो का एक दुसरे पे विश्वास बिलकुल समाप्त होता जा रहा है जिसके कारण इमानदार लोगो पे भी आजकल लोग विश्वास नहीं करते । इस्सी से जुडी एक कहानी आज हम आपको बताएंगे ।

डाकू की ईमानदारी - Story In Hindi With Moral

डाकू की ईमानदारी – Story In Hindi With Moral

डाकू की ईमानदारी

एक डाकू था जो साधु के भेष में रहता था। वह लूट का धन गरीबों में बाँटता था। एक दिन कुछ व्यापारीयों का जुलूस उस डाकू के ठिकाने से गुज़र रहा था। सभी व्यापारीयों को डाकू ने घेर लिया। डाकू की नजरो से बचकर एक व्यापारी रुपयों की थैली लेकर नजदीकी तम्बू में घुस गया। वहाँ उसने एक साधु को माला जपते देखा। व्यापारी ने वह थैली उस साधु को सँभालने के लिए दे दी। साधु ने कहा की तुम निश्चिन्त हो जाओ।

डाकूओ के जाने के बाद व्यापारी अपनी थैली लेने वापस तम्बू में आया। उसके आश्चर्य का पार ना था। वह साधू तो डाकूओ की टोली का सरदार था। लूट के रुपयों को वह दुसरे डाकूओ को बाटँ रहा था।

व्यापारी वहा से निराश होकर वापस जाने लगा मगर उस साधु ने व्यापारी को देख लिया। उसने कहा “रूको, तुमने जो रूपयों की थैली रखी थी वह ज्यों की त्यों ही है।” अपने रुपयों को सलामत देखकर व्यापारी खुश हो गया।

डाकू का आभार मानकर वह बाहर निकल गया। उसके जाने के बाद वहा बैठे अन्य डाकूओ ने सरदार से पूछा की हाथ में आये धन को इस प्रकार क्यों जाने दिया । सरदार ने कहा “व्यापारी मुझे भगवन का भक्त जानकर भरोसे के साथ थैली दे गया था। उसी कर्तव्य भाव से मैंने उन्हें थैली वापस दे दी।” किसी के विश्वास को तोड़ने से सच्चाई और ईमानदारी हमेशा के लिए शक के घेरे में आ जाती है।

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