अन्न का अपमान – Very Short Hindi Moral Story

अन्न का अपमान – Very Short Hindi Moral Story – हमारे बड़े बुजुर्गो ने भी कहा हाँ की हमे कभी अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए और इसे कभी बर्बाद भी नहीं करना चाहिए। इसे व्यर्थ करना इसका अपमान है और आज इस हिंदी स्टोरी से हम आपको इस का अर्थ समझायेंगे ।

अन्न का अपमान - Very Short Hindi Moral Story

अन्न का अपमान – Very Short Hindi Moral Story

अन्न का अपमान – Very Short Hindi Moral Story

एक युवा भारतीय अमीर अपने मित्रो के साथ मौज-मस्ती के लिए जर्मनी गया। उनकी नज़र में जर्मनी एक विकसित देश था, इसलिए वहा के लोग विलासिता का जीवन जीते थे।

डिनर के लिए वे एक रेस्टोरेंट में पहुचे। वहा एक मेज पर एक युवा जोड़े को मात्र दो पेय पदार्थ और दो व्यंजन के साथ भोजन करते देख उन्हें बड़ा
अचम्भा हुआ। सोचा,यह भी कोई विलास है? एक अन्य टेबल पर कुछ बुजुर्ग महिलाए भी बैठी थी। वेटर, डोंगा लेकर टेबल पर आकर हर प्लेट में जरूरत के अनुसार चीजें डाल जाता। कस्टमर अपनी प्लेट में कोई जूठन नहीं छोड़ रहे थे।

भारतीय युवकों ने भी आर्डर दिया परन्तु खाने के बाद आदतन ढेरों झूठन छोड़ दी। बिल देकर चलने लगे तो बुजुर्ग महिला ने यवुकों से शालीनता से कहा, ‘आपने काफी खाना बर्बाद किया है, ये अच्छी बात नहीं है। आपको जरूरतभर ही खाना आर्डर करना चाहिए था। युवकों ने गुस्से में कहा, ‘आपको इससे क्या की हमने कितना आर्डर किया ? कितना खाया और कितनी झुटन छोड़ी ? हमने पूरे बिल का किया है ।

नोकझोक के बीच एक महिला ने कहीं फ़ोन किया और चंद मिनटों में ही सोशल सिक्यूरिटी विभाग के दो अफसर वहा आ पहुचे और सारी बात जानने के बाद युवाओ को पचास यूरो की पर्ची काटकर जुरमाना भरने को कहा।

अफसर सख्ती से बोला, ‘आप उतना ही खाना आर्डर करें, जितना खा सके । माना की पैसा आपका है परन्तु देश के संसाधनों पर हक़ तो पूरे समाज का है और कोई भी इन्हें बर्बाद नहीं कर सकता, क्युकी देश में कितने ही लोग ऐसे हैं, जो भूखे रह जाते हैं। ‘यह सुनकर युवकों ने फिर कभी ऐसी गलती ना करने का फैसला कर लिए ।

सीख:- भोजन व खाद्य सामग्री को बबागद ना करें। इसे जरूरत मंदों को दें।

बच्चो के लिए मोरल स्टोरीज पड़ना ना भूले ।

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