काना और गाँव वाले – Very Short Stories In Hindi Language

काना और गाँव वाले – Very Short Stories In Hindi Language – यह कहानी एक सर्वश्रेस्ट उदहारण है जो की हमे बतायेगा की हमारा देश किस तरह बस एक के पीछे एक भेड़ चाल की तरह चल रहा है ।

काना और गाँव वाले - Very Short Stories In Hindi Language

काना और गाँव वाले – Very Short Stories In Hindi Language

काना और गाँव वाले

एक गाँव में एक काना रहता था। सब लोग उसे एक आँख होने की वजह से काना कहकर चिड़ाते थे। चिडकर उसने गाँव वालों को सबक सिखाने का सोचा। उसने रात को बारह बजे अपनी दूसरी आँख भी फोड़ ली और पूरे गाँव में चिल्लाता हुआ दोड़ने लगा, ‘मुझे भगवन दिखाई दे रहे है’। अच्छे दिन दिखाई दे रहे है।

यह सुनकर गाँव वाले बोले – अरे काने तुझे कहाँ से भगवन या अच्छे दिन दिखाई दे रहे है ?

उसने कहा, ‘रात को सपने में भगवन ने दर्शन दिए और बोले की अगर तू अपनी दूसरी आँख भी फोड़ ले तो तुझे मेरे दर्शन होंगे ।

‘इतना सुनकर गाँव के सरपंच ने कहा, ‘मुझे भी भगवन के दर्शन करने है तो वह अँधा बोला, ‘दोनों आँखे फोड़ोगे तभी दिखाई देंगे ।

सरपंच ने हिमत करके अपनी दोनों आँखे फोड़ ली । पर ये क्या ! अब तो उसे दुनिया दिखाई देना बंद हो गई। उसने अंधे से कान में कहा, ‘भगवन तो दिखाई नहीं दे रहे। ‘ अँधा बोला, ‘सरपंच जी, सबके सामने ये सच मत बोलना नहीं तो सब आपको मुर्ख कहेंगे। इसलिए बोलो की भगवन के दर्शन हो गए।’

इतना सुनकर सरपंच जोर से बोला, ‘मुझे भी भगवन दिखाई दे रहे है।’

इसके बाद एक – एक करके पूरे गाँव वालों ने अपनी आँख फोड़ डाली और मजबूरी में वे वही बोल रहे थे, जो सरपंच ने कहा की भगवन के दर्शन हो गए। हमारे समाज में यही हाल ज्यादातर उन लोगों का होता है जो भेड़ – चाल चलते है ।

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